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Wednesday, July 16, 2014

मिल गया वो,


मिल गया वो
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अँधेरे  में
खिल रही है
लगातार
महक रही है
रात की रानी
सपनो में भी
महकते हुए जब खिले कोई यूँ
तो समझो
मिल गया
वो ............................राकेश मूथा