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Friday, May 7, 2010

...माँ प्यार करती है .....

भीतर कितना सुकून था
आच्छादित  तुझसे
अँधेरे भी  रोशन थे
तुझमे में था
और मुझे में तुम
रेशे रेशे बन रहा था
मौन तेरा  ले रहा था आकार
रास नहीं ये वासना का
महोत्सव था खुद को विसर्जित करने का 
हर पल तू  खुद से कुछ निकाल
देती थी  --- सवारने मुझे
खो देती  खुदको कितनी बार
आज तक न जान पाया तेरा  दर्द
जो मेरे सृजन  में भोगा तूने
तू  हमेशा ही रही मुस्कुराती
और कराहती  सिर्फ मेरे दर्द पर
माँ
तू क्यों भूली अपना दर्द ?
और कैसे में भूलू तुझे
नमन नहीं करता तुझको
तेरा दिया में सबको देता हूँ 
जो भी आता  राह में मेरे
में उसमे तुझे देखता हूँ
यू विश्व  भर फैलती है
राज करती है
मेरी
माँ  प्यार करती है .....

(कल ९ मई को  world mothers day  पर  मेरी माँ ...आदरणीय कमला मुथा के प्यार को समर्पित  ...)

10 comments:

  1. bahut khoob par mothers day to kal hai na...par bahut hi pyari rachna...

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  2. dhanyawad dilip ji aapko ...esliye esit bhi ker diya hai

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  3. मुनव्वर राणा साहब का एक शेर है-

    मेरे गुनाहों को इस कदर धो देती है
    माँ जब गुस्सा में हो तो रो देती है

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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  6. man ke anchal men bhagwan hota hai mata ka diwas mubarak ho

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  7. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 09.05.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://charchamanch.blogspot.com/

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  8. माँ तो केवल देती रही है ... इसलिए तो वो माँ है
    बहुत सुन्दर रचना !

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  9. सुंदर रचना... मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

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  10. रास नहीं ये वासना का
    महोत्सव था खुद को विसर्जित करने का
    हर पल तू खुद से कुछ निकाल
    देती थी --- सवारने मुझे
    खो देती खुदको कितनी बार
    bahut badhiya or gahre udgaar hai !!!!!!!!!!
    maa to padh kar vibhor ho jaaye .

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