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Monday, October 3, 2011

ओर-छोर ---- प्रेम .........

चिड़िया बहुत दिन हुए उदास है 
ऐसा नहीं की उसकी उदासी से बेखबर है पेड़ 
पते पते खुसफुसाहट है 
घोंसले में रोज रोज बिछते है तिनके 
जो चिड़िया लाती है उड़ उड़ दूर दूर से 
सजावट नित नयी होती है 
मगर साँझ पड़े फिर वही उदासी उस घोंसले  में अकेली होती है 
शांत चुप चिड़िया और ताकते पते 
और दूर दूर घूम घूम क्षितिज पार देखता पेड़ 
अचानक स्पंदन होता है तने में 
झूमता  है पेड़ 
पते सारे खिलखिलाते है 
घोंसले में से उड़ जाती है उदासी 
चिड़िया संग 
चोंच से चोंच मिलाता
पसर जाता है 
ओर-छोर ----  प्रेम .........