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Sunday, May 9, 2010

अब शायद ही कभी उतरेगा .......

अचानक सब ख़तम हो जाता  है
अभी था अभी नहीं रहता
साँस का सूत टूट जाता है
देह नहीं रहती
सम्बन्ध वीराने में तड़पता  है
रेगिस्तान में जैसे धुल उडती है
चेहरे पर सारे वे क्षण
जो उसके साथ बीताये
अपने रंगों के साथ
छोड़ देते है गहरी लकीर
वो हो जाता है बीता हुआ क्षण
जो मेरे हर वर्तमान  में अब झांकेगा
मुझे तोड़ेगा कभी
कभी मुझे सहारा देगा
वो न रह कर
इतना रहेगा मेरे साथ
जो अब में बचा पाऊं  अपना आप
तभी उसके प्यार को पहचान दे पाऊँगी
अचानक
ये क्या हुआ ?
क्यों हुआ ?
प्यार का ये रंग
अब शायद ही कभी  उतरेगा .......