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Wednesday, September 16, 2009

समय जो गुजर जाता है
वो
आने वाले समय का केनवास बना जाता है
आने वाले पल क्या कर सकते है बेचारे
सिर्फ़ इतना ही कि धोड़ा बहुत संवार दे उसे
कुछ रंग भर दे
कुछ रंग मिटा दे /
आकार
निश्चित कर जाता है
गुजरा समय
छोड़ आपके हाथ
सिर्फ़ कुछ रंग और एक रबड़
तभी
त्तो
आज को न गुजरने देता हूँ
अपनी कला की छाप के बिना .....जिससे
उभरे वही आकार
जिसे में चाहता
उभारना आज ///