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Monday, September 7, 2009

थामे थामे उनका हाथ

चलोगे क्या
आप हमारे संग?
पूछा और पकड़ हमारा हाथ
ले आये वो अपने संग
इंतिज़ार भी नहीं किया हमारे जवाब का
हम औचक रह गए
सोचते रहे
ये कैसा है बर्ताव ?
आज भी सोच रहे है ---
उम्र के इस पड़ाव
कभी जल्लाहट होती है
कभी क्रोध भी आता है
मगर, वह क्या चीज है ?
जो हमे उनके कहे का अनुसरण
करने को --अब भी करती है मजबूर !
छुडाने का मन नहीं होता उनसे हाथ
क्यों पडू अब इस पचडे में ?
चलती रहू यूँही
बस
थामे थामे उनका हाथ ////..........