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Monday, June 13, 2011

दिन भर याद नहीं आती 
और दिन भर अब याद करना 
कहा इतना आसां
रोजी रोटी 
बहुत मुश्किल हुई यारों 
प्यार ऐसा नहीं  कि हम भूल जाए 
ऐसा भी  नहीं कि वो हमें भूल जाए 
पसीने की बूंद बूंद झरती है 
न जाने कितने लोगो से कब कैसे कैसे मिलते है 
दिन भर फोन  ,टेक्सी  ,कार ,होटल 
नेट ,विडियो कॉफ्रेंस ,बैठके 
सुबह की आठ से रात की नौ 
फिर पार्टियाँ ...रात की बारह 
फिर नींद .........नींद .....
और फिर एक दिन महीने का ऐसा 
 पूरे दिन वो मेरे साथ में उसके साथ 
यों अब इतना मिलता रहे साथ 
ये बहुत है ..कभी हो जाए जो इससे ज्यादा साथ 
उस दिन की कहानी नहीं सुनानी मुझे 
और तुमसे भी कहू
मत सुनना कहानी वो 
मेरे यार !!