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Saturday, September 19, 2009

प्रेम

उसके न होने या होने से
जो असमानता
या समानता
जीवन में होनी थी
वो उसके साथ रहते ही अनुभव करली !
आकाश सदा तना रहता है धरती पर
घास की नोक कभी कभार ही देखती है
आकाश की ओर
जानती है की आकाश है ऊपर
भरोसा है उसके होने का
मगर वास्तव में उसने अनुभव त्तो नही किया
उसके होने का !
प्रेम -
अपनी चरम अवस्था में
अपने प्रियतम का अहसास
उसके होने के भरोसे मात्र से अनुभव करता है
यह यात्रा प्रेम की
सहयात्री की देहिक उपस्थति को अंत में लोप केर देती है
तभी त्तो
प्रेमी या प्रेमिका के न होने से
प्रेम में कोई फर्क कहा होता है ?