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Monday, October 5, 2009

दर्द दांत का

दर्द दांत का

सुजा मुह

कान में जैसे बहता दरिया

दिमाग हो गया शुन्य

अब बिछोह की घड़ी है

५० साल का साथ

यों झटके से कैसे छूटता

दर्द होगा विदाई की बजेगी शहनाईयां

याद रहेगी बिछोह की

मुह में खाली स्थान फिरती रहेगी जीभ

खलती रहेगी कमी एक सजीव को एक निर्जीव की ...

अब चाहो तो सीखो

वरना

गया जैसे दांत

गुजर

जाएगा ये समय भी ....