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Saturday, October 10, 2009

तुम दोगे ना मेरा साथ

शरीर के बाहिर जो क्षेत्र है

वो भीतर के लहू को गति देता है अब भी

शरीर के भीतर का क्षेत्र

अब तलक स्वत्रन्त्र नही

मोसिम के बदलाव में जब तलक न हो मेरी भूमिका

में रहूँगा अब तब तलक अपने भीतर

निहारता अपने को अपनी ही आँख से

सहलाता ख़ुद अपने को अपने ही अंगों से

जगाऊंगा भीतर ऐसी आग

जिससे बदलेगा मेरा आस पास

जिसे में चाहूँगा

जितना में चाहूँगा

नही तुमसे टकराव की नही है ये बात

यही त्तो करने भेजा है तुमने

शरीर दिया है

ख़ुद की शक्ति को

जिसे पहचान

पुरे करुगा स्वप्न तेरे

तुम दोगे न मेरा साथ ////