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Monday, November 30, 2009

अपने पानी के साथ .....

सागर जानता है
मोती ,मानिक ,,पन्ने,शंख
ये मछलियाँ
और एक दिन ये पानी
नहीं रहेगा साथ
रहेगी ये मिटटी
जिस पर वो टिका हुआ है
तभी त्तो तट की ओर
लौट लौट आता है
और तट को सुंदर बनाता है
उसे भिगोता है ,छेड़ता है
अपना नाता बनाता है
और अपने पाट की मिटटी  और गहरे ,और गहरे
उसकी हर शिरा को भरता  है जल से
जो उसके होने को करेगा
हर हाल प्रमाणित
कि सागर है -रहेगा
अपने पानी के साथ .....