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Saturday, April 9, 2011

विश्वास

विश्वास का पौधा 
सूखने लगता है 
अगर उसे सींचा नहीं जाये 
प्रेम और सच्चाई से 
जैसे हरे पत्ते मुरझा जाते है 
पीले पड़ मिटटी की मानिंद 
मिल जाते है मिटटी में 
विश्वास भी बिखर  कर
सम्बन्ध  को धूल धूसरित कर देता है 
फर्क  इतना ही है दोनों में 
पत्ते धूल में मिल नए पत्तों को प्राण देते है 
विश्वास धूल में मिल अवाक कर देता है 
और संबंधो की जमीन को बंजर बना देता है 
इसलिए प्रिय .....और कुछ भी करना 
 न भंग करना
विश्वास 
बचाना हमारे समय को
प्रेम से सीचना
सच्चाई की खाद डाल कर
रखना सदा हरा .......