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Saturday, August 6, 2011

दोस्त

याद नहीं 
कब से है वो साथ 
कोई पल ऐसा नहीं जब वो नहीं साथ 
अहंकार ,क्रोध ,इर्ष्या ,वैमनष्यता 
सब हैरान है 
जब हम होते साथ 
छुप छुप झांकते वे 
कभी न कर पाए वार 
सोचूं नहीं  उससे पाहिले वो है तयार 
कहूँ नहीं  उससे पाहिले मेरा मनचाहा हो जाता 
चोट मुझे आये आंसू वो बहाता 
खुशिया मेरे आँगन नाचे वो अप्नांगन सजाता 
परिवार में कोई काम पड़े तो मुझे पता हो या न हो 
माता पिता,भाई  बहिन ..सब उसे पुकारते 
वो कौन है .....जब में लोगो को बताता 
हैरान होते है सब 
ऐसा भी कोई दोस्त किताबो से निकल 
जीवन में है मिल जाता ........