Search This Blog

Friday, June 20, 2014

याद

तुम्हारी याद
बिखरी है चिड़िया के पाँखों सी
और धूल मैं धूल जैसे रंग में बदल रहे खून सी
हवाएँ भी डर जाती है
इस वीरानी को उड़ाने से
उसे भी डर है
हो न जाए दुनिया फिर सूनसान
अपनी पहचान से पहिले सी ...राकेश मूथा