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Saturday, September 12, 2009

चिडिया को पता ही नही चला

कब हुआ ये सब

धड़कन के भीतर

ये और कौन धड़कने लगा

क्यूँ ये घोंसला छोड़

नया घोंसला बनाने को जी करने लगा

धोडी सी उड़ान में ही जी मचलने लगा

उस चिडिया को पता था

जिसने उसे पैदा किया था

की कितनी अकेली हो गई है मेरी बिटिया

और यह भी की

हर बेटी के नसीब में लिखा है

भोगना ये अकेलापन

जो

उसे कल बनाएगा

माँ ///