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Sunday, September 6, 2009

प्यार करूँ

प्यार करू
ऐसे ही नहीं कोई जाता है
जाता है
त्तो फिर कितनी
बातें छोड़ जाता है
जैसे सागर की लहर छोड़ जाती है

,सीपियाँ ,मरी मछलियाँ और कीच


अब ये मुज पर है
में सीप चुनू या मोती या कि मरे जीव ...
चले गए ----तुमको
कोसूं क्यों ?


और क्यों ... खुदको ?


प्यार करू
याद कर करके
जोश भरू
हर जीवन में
तेरा प्यार भरू ........