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Wednesday, September 9, 2009

वो

नींद आती है गहरी
आँख खुली है उनके इंतिज़ार
कब आयेंगे
कब में उनसे मिल सो रहूंगी
कुछ ख़बर कहा
जब भी देखो उनकी बातें
उनका ही सोच मुझ संग चलता है
मेरे बस कुछ नही
जबसे आया इस दुनिया
वो नही है संग
मगर सब उसके
कारन और उसकी चाह
से ही होता है
नींद में भी वो जाग में ही वो
मगर कभी वो नही प्रत्यक्ष
सब मुज्में अप्रत्यक्ष होता है ,,,,,
अब तुम जो भी सोचो
बात यही सच है
वो नही मगर
हम सबके भीतर
वही रहता है //////