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Thursday, October 1, 2009

एक दिन लौटेगा

रुको
सुनो
ठहरो
मत ताको बाहिर
में हूँ
नही पहिचाना
खुदको
बरसो से कहते गुरु सारे
ग्रंथ सारे ,
मगर अब तक खोजा
तुमने खुदको बाहिर
अरे ,में किस-से कर रहा बात
वो त्तो मशगूल है
मदहोश है
अब भी
बाहिर की दुनिया में ...
मुझे है विस्वास
एक दिन लौटेगा
वो अपने भीतर
तब तलक हूँ
और रहूँगा में उसके भीतर ///