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Saturday, October 3, 2009

बढ़ते अंधकार में रोशनी

कहने को तो जलाली मैंने भी मोमबत्ती
और जल भी गई
मगर भीतर गहरा हो गया अँधेरा
इस प्रकाश से आलोकित
तेरे चेहरे
परावर्तित
हुई रौशनी में दिखा मुझे
मेरा कालापन .......
में तब से अपने अंधेरे
जलाता हूँ
रोज दिया तेरे नाम का
और अपने बढ़ते अन्धकार को
रौशनी के और निकट ,और निकट ले जाता हूँ
शायद हो जाऊँ रोशनी ...एक दिन