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Sunday, October 4, 2009

शयद तुम दिख जाओ मुझे चाँद

बरसात में
भीगते भीगते
गायब हो गई तुम
में देर तक ढूँढता रहा तुम्हे
बन बादल घाटियों में देर तलक
जंगलों में पेडों पर के घोसलों में
नदी में बन लहर
धरती पर बन रेत
पहाड़ पर बन पत्थर
आँख में बन रौशनी
दिल में बन धड़कन
बदन पर बन रोएँ
मुह में बन जुबान
नाक में बन गंध
में खोजता रहा
बरसात कब की हो गई बंद
अब बन धूल हवा में उड़ रहा हूँ
पहुंचूंगा आकाश में बन्ने सितारा
शायद तुम दिख जाओ मुझे चाँद ....//////