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Friday, November 13, 2009

भीग आता हूँ अपने प्यार से ...

पहाड़ पर बादल 
रुई के फाहे से 
घेर कर मुझे 
कर देते है गीला 
छेड़ते है 
और पूछते है 
अकेले क्यों यहाँ ?
क्यों नहीं लाय
साथ   उनको..?

और बादलों के संग उड़ 
 मैं बूँद बन 
बरसात की 
भिगो देता  हूँ अपने प्यार को..
भीग आता हूँ अपने प्यार से ...