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Saturday, December 5, 2009

पानी में पानी के मिलने तक

दिन, महीने-  बर्फ की तरह जमते  जाते  है
समय शिला पर
ग्लेशियर  बन जाते है
फिर कभी न पिघलने के लिए
मगर भावनाओं की आंच जब धधकने लगती है
किसी की याद में
तब बहने लगती है बर्फ
याद की नदी बन
जो तुम्हे खोज ले आती है 
अनन्त महासागर से
और फिर बारिश थमती नहीं
सब कुछ धुंधला हो जाता है
पानी में पानी के मिलने तक
समय शिला जो हुई  थी सफ़ेद
अब हरियल घाटी में बदल जाती है ///          .....राकेश