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Saturday, January 30, 2010

होता है रोशन ......

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रोशनी बताती है
अँधेरे को रास्ता
अँधेरा अपने अहम् में मदहोश
इशारा करता है
अपने अंधेरों की ओर
कि अगर जीवन का लेना हो सच्चा आनंद
तो गुम हो जाओ इन अँधेरी गुफाओं  में
कोई नहीं पहचान पायेगा तुम्हे  यहाँ
फिर जैसा भी चाहो करो तुम
और  ठहाका लगाता है वो
जिसका अंत
डरा देता है रोशनी को
हंसी में भरा है उसके कितना रूदन !
सहलाती है अँधेरे को गोदी में लेकर
रौशनी अँधेरे को दुलारती है
धीरे धीरे अँधेरा
होता है रोशन ......