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Wednesday, April 21, 2010

शायद चाँद रीझ जाएगा

अँधेरे में हिरन
तेज और तेज दौड़ता
आतुर होता
चन्द्र किरणों का हाथ पकड़
भागा  जाता है 
चाँद को छूने
अपनी बाहों में लेने 
टांगो में उसके दौड़ती है कामनाये
आँखों में उसके पसरती जाती है ललक
मंजिल मिलेगी नहीं
यह जानता है हिरन 
और यही बात उसको  देती है ताक़त 
असंभव को संभव बना देने की प्यास भड़कती है
हिरन की दौड़ में
दीवानगी की हद तक
पसरती जाती  है  प्यास
दौड़ और तेज.. और तेज होती जाती है 
शायद चाँद रीझ जाएगा
कभी 
हिरन  की बाँहों  में आ रहेगा  .......