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Monday, September 6, 2010

मां ...


छिलका उतारते हुए नारियल का
याद आई-- मां
अपने रेशे रेशे से बनाया
जिसने इस गिरी को ...
उसको हम कहाँ पहचानते आज
जिसने खुद सहे धुप,बर्फ ,आंधी ,तूफ़ान के थपेड़े
वो छिलका
फैक दिया गया है मलबे में
मां ..../