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Tuesday, September 28, 2010

जिस कोने था वो कल
उस कोने को खाली कर
वह जला दी गयी है अगरबत्ती
जो छोड़ रही है रह रह महक
जैसे वो देता था खुस्ब्बू
साँस साँस धुंवा छोडती अगरबत्ती
भी बुझ गयी है
कोना अँधेरे से घर गया है
कल सबह की पहली किरण
शायद ये कोना फिर हो जाये आबाद
मगर मैं ये जानता हूँ वो अब नहीं आयेगा