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Sunday, October 24, 2010

समय की हांडी

धीमी आंच में सेंकता  रहा है
समय पकाता गया है
उन बात्तों को जो किसी ने नहीं सिखाई
समय की इस हांडी ने
घटनाओ दुर्घटनाओ
दोस्तों ,घर परिवार
नाते रिश्तों की उष्मा से
पका कर जो कुछ दिया है
वही  मेरे काम आया है
मेरे व्यवहार को इस हांडी ने
हमेशा रास्ता दिखाया है
अब भी
सिक रही है समय की हांडी
धीमी धीमी आंच से ........
अब भी पका रहा है
समय ...