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Saturday, November 27, 2010

कैसे हो जाती है घृणा ?

कैसे हो जाती है घृणा ?
बिना किसी को जाने होती है
या
किसी को प्रेम करने के बाद होती है
ये रास्ता कैसे बनता है अलगाव का
क्यों हम जान ले लेना चाहते है किसी की
क्यों किसी को पीड़ा देकर खुश हो जाता है मन
बहुत सोचा ,बहुत पूछा ,बहुत कोशिस की घृणा करने की
मगर कभी  भी न कर सका
इस उम्र तक पहुँचते प्रेम में बदल गया
फिर कहा से आती है ये ?
दोस्त मेरे जो तुम मुझसे करते हो घृणा
ये तुम्हारी जमीन की फसल नहीं है
किसी ने की है साजिश ..
पूछो अपने मन से
वो येही जवाब देगा
जो ये कविता देती है .........