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Friday, December 10, 2010

ग़ज़ल वो गा गया

वो लम्हों को बीते हुए पलों को गा गया
कल शाम संगीत साँस साँस महका गया

जो छूट गयी थी डोर उसके और मेरे बीच
बिना गाँठ लगाये  जाने कैसे जोड़ गया  

बरस हुए मिले न ही  उसकी आवाज सुनी
कल शाम वो  उसको पास मेरे छोड़ गया 

पास बैठा था आकर मेरे पास इस अंदाज़
दीवाना मैं था और  ग़ज़ल वो  गा गया

शाम सर्दियों की समेट रही थी मुझे मगर
रात मौसम न रहा तन से वो निकाल गया

अब मत पूछना मंडल कौन है वो ,कौन 
अब भी न जानो तो  कहना बेकार गया