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Monday, February 21, 2011

जियो शान से ......

पता नहीं 
क्या सत्य 
झूठ  क्या 
जो समझ आया 
वह यही 
जिस राह कम बाधाएं हो 
वह राह ही सत्य की 
जहा संघर्ष हो 
त्याग हो ...बलिदान हो 
उस राह भेजो किसी  और को 
और उस राह चलते वो अगर 
हो जाए शहीद तो रो लो 
उसकी मूर्तियाँ लगालो 
मगर उसकी राह न चलो ..
बचो ..बचते रहो ..
सच झूठ की परिभाषा 
अपने हक में बदलते रहो .....
और यूँ जब तक मरो नहीं 
जियो शान से ......