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Monday, May 16, 2011

डूबे इश्क में

बहुत उम्दा है --- सपना 
आँखों ने रख  लिया उसे  अपने पास 
कभी भी ओझल नहीं होने देती है 
बहुत समझाता है तन  ...शरीर के सारे अंग 
मानती नहीं आँख 
जमीन सख्त है 
कहते है पावं
यूँ  आसान नहीं 
दुनिया में हाथो के कौशल के बिना 
हाथ डींग मारते है 
कलेजा फट जाता है कई बार 
जब विसंगतिया आती है सामने 
ह्रदय चीखता है ....
इन सब के बीच 
एक वो  हँसता है 
मुस्कराता है 
 सपने के रंगों से  होता है सराबोर 
अब वो और आँख और सपना 
डूबे इश्क में 
कुछ नहीं सुनते ....शोर अभी भी है.....