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Wednesday, June 8, 2011

भिगोयेगा हमें फिर

बरसातों से पहिले तेज गर्मी 
धूल भरी  आंधियां 
बादलों का बार बार आना जाना 
उमस का पसरना 
पसरती  उमस .....
का फिर  बिखरना बूंदों  में 
बरसना फिर जम कर
समझा मेने ये सब प्रिया 
समझ लो तुम भी 
विरह ये जब जलाएगा 
मिलन की ठंडी फुहारों से 
नहलाएगा  ,भिगोयेगा हमें फिर